Indore :- भिखारी बने समस्या… पकड़-पकड़कर छोड़ें , प्रशासन का भिखारीमुक्त शहर अभियान दिखावा साबित हो रहा |

इंदौर, हुंजर शहर को भिखारीमुक्त बनाने का कलेक्टर आशीषसिंह का सपना शायद ही पूरा हो पाता है। भिखारियों को पकड़ने के बाद उन्हें पकड़ने और पुनर्वास करने की बजाय छोड़ दिया जाता है। विभाग ने हाईवे से अधिक सड़कों पर ही चेतावनी देकर छोड़े… 22 को आश्रम में रखा, फिर उन्हें समाजसेवी देकर छोड़ना पड़ा।

प्रशासन का भिखारीमुक्त शहर अभियान दिखावा साबित हो रहा |

भले भिखारी निचले वर्ग की मुफ्ती में 22 को मां मंदिर के पास के हिस्सों में रखा, लेकिन फिर भी शहर में भिखारियों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है। भिखारियों की समस्या से निपटने के लिए प्रशासन की कार्यप्रणाली को निचले स्तर पर समझने की जरूरत है।

यह समस्या बाल मजदूरी की… मजदूर बालिका को 35 हजार की एफडी देकर विदा किया

बाल मजदूरी को मुक्त करने के उद्देश्यों के तहत कई अभियानों को संचालित किया गया है। मजदूर बालिका की शिक्षा और उज्जवल भविष्य के लिए 35 हजार की एफडी दी गई। अभियान के तहत बच्चे को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के साथ ही उज्जवल भविष्य के लिए प्रयास किया गया। इसके तहत पिछले साल 22 में 3193 भिखारियों को पकड़ा गया और 2022-23 में 3193 लोगों को रेस्क्यू कर पुनर्वास का काम किया गया।

इसके बावजूद पिछले वर्ष 22 में 24 और इस साल 23 में 3193 भिखारियों को पकड़कर छोड़ा गया है। विभाग ने अब तक 6 वर्ष के तहत कुल 7 किशोर भिखारियों को रेस्क्यू किया।

90 हजार रुपए से संवरेंगा भविष्य

बालिकावाड़ी की बच्ची को उज्जवल भविष्य के लिए 90 हजार की एफडी दी गई। विभाग का उद्देश्य है कि बच्चे सुरक्षित जीवन जी सकें। इस कार्य में सरकारी विभागों के साथ मिलकर समाजसेवी संस्थाएं भी अपना योगदान दे रही हैं। विभाग का दावा है कि इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों को निरंतर संचालित किया जा रहा है।

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