10वीं-12वीं के कमजोर परिणाम का परिणाम,बच्चे फेल तो शिक्षकों पर गाज, वेतनवृद्धि रुकेगी !

Indore news

इंदौर। प्रदेश में शिक्षा के हब के नाम से इंदौर शहर प्रदेश भर में प्रसिद्ध है, लेकिन यहां के सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियों के कमजोर होने से 10वीं-12वीं का परिणाम कमजोर आ रहा है। इसके बाद भोपाल से निर्देश मिलने पर अधिकारियों ने समीक्षा बैठक बुलाई, जिसमें निर्णय लिया गया कि शिक्षकों की वेतनवृद्धि रोके जाने की सिफारिश की जा रही है।

10वीं-12वीं के कमजोर परिणाम का परिणाम,बच्चे फेल तो शिक्षकों पर गाज, वेतनवृद्धि रुकेगी ! समीक्षा बैठक और निर्णय

शासन द्वारा शिक्षा बोर्ड की परीक्षा में कमजोर रिजल्ट देने वाले शिक्षकों की वार्षिक वेतनवृद्धि रोकने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में नाराजगी जताई गई है। तत्पश्चात शिक्षकों का कहना है कि अतिथि शिक्षकों की गलती की सजा उन्हें दी जा रही है। नियमित शिक्षकों का तर्क है कि स्कूलों में लंबे समय से अतिथि शिक्षक पढ़ा रहे हैं, जिनका शिक्षण स्तर अच्छा नहीं होने के कारण परीक्षा परिणाम प्रभावित हुआ है।

शिक्षकों का बयान !

शिक्षक बोले, “अतिथि शिक्षकों की गलती, उन्हें ठीक से नहीं पढ़ाया।” शिक्षा विभाग की ओर से सीमांकन की प्रक्रिया शुरू की गई है जिसमें अधिकारियों ने करीब 100 से अधिक स्कूलों का निरीक्षण कर शैक्षणिक गतिविधियों की समीक्षा की है। निरीक्षण के दौरान स्कूलों में आवश्यक सुविधाओं के बावजूद भी छात्रों के परिणाम खराब पाए गए हैं।

परिणाम सुधारने के प्रयास

शिक्षकों की मांग है कि 10वीं और 12वीं में फेल होने वाले छात्रों की काउंसलिंग की जाए और उनके लिए अतिरिक्त कक्षाओं का आयोजन किया जाए ताकि वे अपने विषयों में अच्छा प्रदर्शन कर सकें। इसके अलावा नियमित शिक्षकों का कहना है कि यदि अतिथि शिक्षकों की कमी को पूरा किया जाए और उन्हें उचित प्रशिक्षण दिया जाए तो परिणामों में सुधार आ सकता है।

समय पर शिक्षकों की कमी पूरी होती तो परिणाम बेहतर आता

विभागीय समीक्षा में पाया गया कि कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी होने के कारण भी परिणाम प्रभावित हो रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि यदि समय पर शिक्षकों की नियुक्ति होती और उनकी उपस्थिति सुनिश्चित की जाती तो परिणाम बेहतर आ सकते थे।

इस संबंध में अधिकारियों ने निर्णय लिया है कि जिन स्कूलों में परिणाम खराब आएंगे, वहां के शिक्षकों की वार्षिक वेतनवृद्धि रोक दी जाएगी और उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। यह कदम शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए उठाया गया है।

शिक्षा विभाग का मानना है कि इस निर्णय से स्कूलों में शिक्षण कार्य में सुधार होगा और शिक्षक अपने कर्तव्यों का पालन पूरी निष्ठा से करेंगे।

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