खटारा डेमू ट्रेनों को खींच रहे बिजली के इंजन,रतलाम मंडल की कोई पूछपरख नहीं !

इंदौर। रतलाम-इंदौर-महू रूट को खटारा थकली डेमू ट्रेनों से निजात नहीं मिल पा रही है। यही वजह है कि आए दिन कुछ डेमू ट्रेनों (डीजल मल्टीपल यूनिट) को चलाने के लिए बिजली के इंजन लगाना पड़ रहे हैं, जबकि डेमू ट्रेनों में अलग से इंजन लगाने की जरूरत नहीं होती।

रतलाम मंडल की कोई पूछपरख नहीं, रेलवे बोर्ड से नहीं मिल रहा मेंटेनेंस का रेक !

तकल़ीफ यह है कि डेमू ट्रेन की पावर कार बार-बार खराब हो जाती है, जिससे ट्रेन बीच रास्ते में खड़ी हो जाती है। इससे यात्री तो परेशान होते ही हैं, रेलवे को आसपास के स्टेशनों से इंजन की व्यवस्था भी करनी पड़ती है। इसी कारण बार-बार डेमू ट्रेन को बिजली के इंजन लगाकर चलाया जा रहा है। यह हालत तब है, जब दो डेढ़-दो साल से लगातार डेमू ट्रेनों में डिब्बे आराम लगाने और जहां-तहां खड़ा होने की शिकायतें मिलती हैं।

रतलाम रेल मंडल रेलवे बोर्ड से बार-बार डेमू ट्रेनों मेंटेनेंस का रेक (मेन लाइन इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट) उपलब्ध कराने की अनुरोध कर चुका है, लेकिन अभी तक रतलाम मंडल को कोई नवाजनी नहीं दे रहा है।

विद्युतीकृत रूट होने के बावजूद डीजल में पैसा कर रहे बर्बाद

रतलाम-फतेहाबाद-इंदौर-महू रूट काफी साल से विद्युतीकृत है। इस रूट पर सुपरफास्ट और सुपरफास्ट ट्रेनों को बिजली के इंजन से चलाया जा रहा है, लेकिन यहां पुरानी डेमू ट्रेनों का मेंटेनेंस नहीं बदला जा रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि उच्च स्तर पर दबाव डाल नहीं पा रहे हैं, जनप्रतिनिधियों की भी अनदेखी है और इस समस्या के अते-पते नहीं हैं।

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